‘वोटर लिस्ट’ के बहाने अभिषेक का चुनाव आयोग पर बड़ा हमला

बंगाल में मतदाता सूची के एसआईआर के आंकड़ों ने राज्य की सियासत में भूचाल ला दिया है। शनिवार को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची के बाद तृणमूल कांग्रेस के सर्वभारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को मोर्चा संभालते हुए सीधे निर्वाचन आयोग को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने सनसनीखेज आरोप लगाया कि मतदाता सूची से नाम काटने का टारगेट बहुत पहले ही तय कर लिया गया था और आयोग ने केवल उस स्क्रिप्ट पर मुहर लगाने का काम किया है। तृणमूल भवन में आयोजित एक पत्रकार वार्ता में अभिषेक बनर्जी ने भाजपा नेताओं के पुराने बयानों के वीडियो साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए। उन्होंने दावा किया कि भाजपा के कई बड़े नेता महीनों पहले से ही एक करोड़ से अधिक नामों को हटाए जाने की भविष्यवाणी कर रहे थे। अभिषेक ने कड़े शब्दों में कहा कि बीजेपी नेताओं ने पहले ही तय कर दिया था कि कितने नाम कटेंगे और अंतिम सूची में वही आंकड़े सामने आए हैं। यह साबित करता है कि आयोग निष्पक्ष रहने के बजाय भाजपा की सहायक संस्था के रूप में काम कर रहा है। अंतिम सूची के विश्लेषण पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि करीब 64 लाख मतदाताओं के नाम सीधे तौर पर हटा दिए गए हैं, जबकि 60 लाख से अधिक नाम न्यायाधीन (एडजुडिकेशन) की श्रेणी में हैं। इस तरह कुल 1 करोड़ 24 लाख मतदाताओं का भविष्य अधर में लटका दिया गया है। 
अभिषेक ने सवाल उठाया कि जब ईआरओ और एआरओ के पास शुरुआत में केवल 14 लाख असुलझे मामले थे, तो अचानक कौन सी जादू की छड़ी चली कि यह संख्या बढ़कर 60 लाख के पार पहुंच गई? उन्होंने आरोप लगाया कि किसके दबाव में इतने बड़े पैमाने पर वैध नागरिकों को विचाराधीन की श्रेणी में धकेला गया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए अभिषेक ने कहा कि अदालत ने स्पष्ट किया था कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए, लेकिन यहाँ नियमों की धज्जियां उड़ाई गईं। उन्होंने चुनौती भरे लहजे में कहा कि यदि सच बोलने के लिए मुझ पर मुकदमा करना है, तो अवश्य करें। मैं कोर्ट में लडऩे के लिए तैयार हूँ और मेरे पास आयोग की विफलता के एक नहीं, कई पुख्ता सबूत हैं। 
अभिषेक बनर्जी के इन तीखे तेवरों ने साफ कर दिया है कि तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे को केवल राजनीतिक मंच तक सीमित नहीं रखेगी, बल्कि इसे कानूनी और सड़क की लड़ाई में तब्दील करेगी। 6 मार्च को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के प्रस्तावित धरने से पहले अभिषेक का यह हमला बंगाल की चुनावी बिसात को और अधिक गर्म कर गया है।

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