कोलकाता में कॉमर्शियल एलपीजी गैस की किल्लत का असर अब शहर के स्ट्रीट फूड कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। गैस सिलेंडरों की कमी और उनकी बढ़ती कीमतों के कारण पार्क स्ट्रीट, डलहौजी, डेकर्स लेन, कैमेक स्ट्रीक, बड़ाबाजार और एस्प्लेनेड जैसे इलाकों में कई छोटे होटल और खोमचे वालों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो गया है। शहर के पार्क स्ट्रीट इलाके में मेट्रो भवन के पास ही करीब 5 स्ट्रीट फूड की दुकानें बंद हो चुकी हैं। दुकानदारों का कहना है कि गैस नहीं मिलने और सिलेंडरों की कीमत कई गुना बढ़ जाने से दुकान चलाना मुश्किल हो गया है। पहले जहां कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडर लगभग 1,600 रुपये में मिलता था, उसका दाम अब ब्लैक में 6,000 रुपये तक पहुंच गया है। इसका असर ग्राहकों पर भी पड़ रहा है। जहां पहले 7 रुपये की चाय मिलती थी, वह अब 10 रुपये में और 10 रुपये की चाय 15 रुपये में बिकने लगी है। लागत बढ़ने के कारण दुकानदारों को मजबूरन कीमतें बढ़ानी पड़ रही हैं। महानगर कोलकाता से सटे हावड़ा का भी यही हाल है।
मध्य कोलकाता की प्रसिद्ध डेकर्स लेन फूड स्ट्रीट, जहां रोज हजारों ऑफिसकर्मी भोजन करने आते हैं, वहां भी गैस संकट का गहरा असर पड़ा है। कई दुकानों में पहले जहां 25–30 तरह के व्यंजन बनते थे, अब मेन्यू घटाकर 10–12 आइटम तक सीमित करना पड़ रहा है। कई दुकानदारों को दिन में केवल एक बार ही खाना बनाना पड़ रहा है, क्योंकि गैस सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है। कुछ दुकानदारों का कहना है कि ज्यादा रुपये देने पर भी गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा, जिसके कारण कई जगहों पर आधे से ज्यादा आइटम बन ही नहीं पा रहे हैं। कई दुकानों में आटा गूंधकर रखा रह जाता है और बीच में ही गैस खत्म हो जाती है। गैस की कमी के कारण कुछ स्ट्रीट फूड विक्रेता अब कोयले और लकड़ी के चूल्हों पर फिर से खाना बनाने लगे हैं।
गैस संकट का असर सिर्फ स्ट्रीट फूड तक सीमित नहीं है। शहर के कई रेस्तरां और कैफे भी गैस की कमी से जूझ रहे हैं। दक्षिण कोलकाता में एक लोकप्रिय रेस्तरां और एक कैफे को गैस न मिलने के कारण अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा है। कई रेस्तरां मालिक अब मेन्यू सीमित करने, काम के घंटे घटाने या वैकल्पिक ईंधन अपनाने पर विचार कर रहे हैं। शहर के कई नामी रेस्तरां को हर महीने सैकड़ों कॉमर्शियल सिलेंडरों की जरूरत पड़ती है। छोटे रेस्तरां भी महीने में लगभग 30 सिलेंडर तक इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में आपूर्ति बाधित होने से पूरे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
