पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में एक गर्भवती आदिवासी महिला के साथ हुई कथित मारपीट और उसके बाद नवजात की मौत की घटना को लेकर ‘जनजाति सुरक्षा मंच’ का विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। आंदोलनकारियों ने जब राज्य सचिवालय ‘उत्तरकन्या’ की ओर मार्च करने की कोशिश की, तो तीनबत्ती मोड़ पर पुलिस ने उन्हें बैरिकेड्स लगाकर रोक दिया। इसके बाद स्थिति तब बिगड़ गई जब प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव और पानी की बोतलें फेंकनी शुरू कर दीं, जिसमें धनुष-बाण और तलवारों जैसे पारंपरिक हथियारों का भी उपयोग किया गया। जवाब में पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े, वाटर कैनन का उपयोग किया और अंततः लाठीचार्ज करना पड़ा। इस हिंसक झड़प के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर टायर जलाकर रास्ता जाम कर दिया गया, जिससे यातायात घंटों बाधित रहा।
यह पूरा मामला पिछले साल दिसंबर में फाँसीदेवा इलाके में एक जमीन विवाद के दौरान ७ महीने की गर्भवती महिला पर हुए हमले से जुड़ा है, जिसके बाद समय से पहले प्रसव के कारण उसके बच्चे की मौत हो गई थी। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले में उचित कार्रवाई नहीं की है, जबकि पुलिस के अनुसार अब तक ४ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इस विरोध प्रदर्शन में भाजपा के कई विधायक और नेता भी शामिल हुए, जिन्होंने पुलिसिया कार्रवाई की कड़ी निंदा की। पुलिस ने हिंसा फैलाने के आरोप में ८ से १० प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है। प्रशासन ने इलाके में तनाव को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए हैं और शांति बनाए रखने की अपील की है।
