सिलीगुड़ी : चुनावी समर में आमने-सामने ‘मां-बेटे, आशीर्वाद लेकर रंजीत शील शर्मा ने शुरू किया प्रचार

जलपाईगुड़ी जिले के सिलीगुड़ी संलग्न डाबग्राम-फूलबाड़ी विधानसभा क्षेत्र में इस बार चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प और भावनात्मक मोड़ ले चुका है। यहाँ भाजपा की निवर्तमान विधायक शिखा चटर्जी के सामने उनके ही ‘राजनीतिक पुत्र’ और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के प्रत्याशी रंजन शील शर्मा चुनावी मैदान में हैं।आज  सुबह चुनाव प्रचार की शुरुआत एक अनोखे दृश्य से हुई, जब तृणमूल प्रत्याशी रंजन शील शर्मा ने अपनी प्रतिद्वंद्वी और राजनीतिक गुरु शिखा चटर्जी के पैर छूकर आशीर्वाद लिया। शिखा चटर्जी ने भी बड़े दिल का परिचय देते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया और कहा, “रंजन की सद्बुद्धि जागृत हो और वह देश व जनता के लिए अच्छा काम करे।”  

गौरतलब है कि रंजन शील शर्मा ने शिखा चटर्जी के मार्गदर्शन में ही राजनीति की एबीसीडी सीखी थी। साल 2021 तक शिखा देवी ने उन्हें ऊँगली पकड़कर राजनीति की राह दिखाई। हालांकि, 2021 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले शिखा चटर्जी भाजपा में शामिल हो गईं और वहां से चुनाव जीतकर विधायक बनीं। उस चुनाव में उन्होंने सिलीगुड़ी के वर्तमान मेयर गौतम देव को शिकस्त दी थी।इस बार समीकरण बदल चुके हैं:शिखा चटर्जी: भाजपा की ओर से अपनी सीट बचाने के लिए मैदान में हैं।रंजन शील शर्मा: सिलीगुड़ी नगर निगम के वार्ड नंबर 36 के पार्षद हैं, जिन्हें TMC ने शिखा चटर्जी के खिलाफ उतारा है।गौतम देव: इस बार डाबग्राम-फूलबाड़ी के बजाय सिलीगुड़ी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। प्रचार के दौरान रंजन शील शर्मा ने भावुक होते हुए कहा, “शिखा देवी मेरी मां के समान हैं। राजनीति और व्यक्तिगत जीवन में बहुत अंतर होता है।

व्यक्तिगत जीवन में उनका आशीर्वाद मेरे साथ हमेशा था और रहेगा।”राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि डाबग्राम-फूलबाड़ी सीट पर तृणमूल की स्थिति पिछले चुनावों में काफी कमजोर रही है। ऐसे में भाजपा की मजबूत पकड़ वाली शिखा चटर्जी को घेरने के लिए सत्ताधारी दल ने उनके ‘मानस पुत्र’ को ही हथियार बनाया है। अब देखना यह होगा कि क्या एक शिष्य अपनी गुरु (मां) को चुनावी अखाड़े में मात दे पाता है या नहीं।

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