SIR का खौफ: दस्तावेज लेकर तमलुक ब्लॉक ऑफिस पहुंचे बीमार बुजुर्ग, आंखों में आंसू और मन में नाम कटने का डरतमलुक

पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) और ‘लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी’ (तार्किक विसंगति) की जांच अब आम नागरिकों, विशेषकर बुजुर्गों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। तमलुक के शहीद मातंगिनी ब्लॉक में सोमवार सुबह से ही ऐसी हृदयविदारक तस्वीरें सामने आईं, जहाँ 70-80 साल के बुजुर्ग अपने दस्तावेज लेकर ब्लॉक ऑफिस की सीढ़ियों पर बेबस नजर आए। शहीद मातंगिनी ब्लॉक के शांतिपुर-1 ग्राम पंचायत के कुल 55 लोगों को नोटिस भेजकर ब्लॉक ऑफिस बुलाया गया था। प्रशासन का कहना है कि इन लोगों के नाम में त्रुटि है या फिर इनके नाम का लिंक 2002 की मतदाता सूची से नहीं मिल पा रहा है।

इसी ‘लिंक’ को खोजने के लिए ‘विशेष स्क्रूटनी’ (Special Scrutiny) की जा रही है। अपने पति और बेटे को खो चुकीं 75 साल की बुजुर्ग सनका दास आज अपनी बेटी के सहारे किसी तरह रेंगते हुए ब्लॉक ऑफिस पहुंचीं। उम्र के इस पड़ाव पर वह ठीक से चल भी नहीं पातीं, लेकिन मतदाता सूची से नाम कटने के डर ने उन्हें घर पर रुकने नहीं दिया। उनकी आंखों के आंसू प्रशासन की इस जटिल प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैंसनका दास की तरह ही श्रीकृष्ण घड़ा और कई अन्य बुजुर्ग भी अपनी बीमारी और शारीरिक अक्षमता के बावजूद जरूरी कागजात लेकर सुनवाई केंद्र पर हाजिर हुए। इन सभी के चेहरे पर एक ही खौफ था—”क्या इस उम्र में हम अपनी पहचान खो देंगे?”SIR की इस प्रक्रिया ने तमलुक में भारी तनाव पैदा कर दिया है।

लोगों का आरोप है कि पुरानी सूचियों (2002 की लिस्ट) के साथ मिलान करने के नाम पर उन लोगों को भी परेशान किया जा रहा है जो दशकों से वोट देते आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन को बीमार और अति-वृद्ध लोगों के लिए घर पर जाकर सत्यापन करने जैसी मानवीय व्यवस्था करनी चाहिए थी। ब्लॉक अधिकारियों का कहना है कि वे चुनाव आयोग के निर्देशों का पालन कर रहे हैं ताकि मतदाता सूची को पूरी तरह त्रुटिहीन बनाया जा सके। दस्तावेजों के सही पाए जाने पर किसी का नाम नहीं काटा जाएगा।

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