यामी गौतम बोलीं — “संवेदनशील कहानियां मुझसे जुड़ती हैं”

अभिनेत्री यामी गौतम अपनी नई फिल्म ‘हक’ को लेकर सुर्खियों में हैं। सुपर्ण वर्मा के निर्देशन में बनी यह फिल्म शाह बानो केस से प्रेरित है, जिसने देश में मुस्लिम पर्सनल लॉ, यूनिफॉर्म सिविल कोड और महिलाओं के अधिकारों पर बड़ी बहस छेड़ दी थी।

फिल्म में यामी ‘शाजिया’ नाम की एक ऐसी महिला की भूमिका निभा रही हैं, जो समाज और सिस्टम से अपने अधिकार और सच्चाई के लिए संघर्ष करती है। यह फिल्म 7 नवंबर को रिलीज होगी।

“मैं सिर्फ शाजिया नहीं, हर उस औरत की आवाज हूं जो न्याय चाहती है”
यामी ने कहा, “मैं हाईस्कूल में थी जब पहली बार शाह बानो केस के बारे में पढ़ा था। उनका चेहरा और उनकी आंखों का दर्द आज भी याद है। जब ‘हक’ मेरे पास आई, तो लगा जैसे मैं उसी दौर में लौट गई हूं। स्क्रिप्ट पढ़ते ही महसूस हुआ कि इसमें सच्चाई और गहराई दोनों हैं। भले यह बायोपिक नहीं है, लेकिन किरदार की गरिमा बनाए रखना सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी।”

उन्होंने आगे कहा, “हमने कोशिश की कि यह फिल्म डॉक्यूमेंट्री जैसी न लगे, बल्कि एक ऐसी कमर्शियल फिल्म बने जो लोगों को सोचने पर मजबूर करे और उनसे भावनात्मक रूप से जुड़ सके।”

“हिम्मत मुझे मेरे घर से मिलती है” यामी का कहना है, “मेरी फिल्मों में एक पैटर्न है — ‘उरी’, ‘आर्टिकल 370’ और अब ‘हक’। हर बार मैं एक ऐसी औरत बनती हूं जो समाज या देश की आवाज बन जाती है। यह हिम्मत मुझे मेरे घर से मिलती है। मेरे परिवार की औरतें बहुत मजबूत हैं — मेरी मां, बहन, और मेरे पिता व पति — सभी ने हमेशा मेरा साथ दिया है। कई बार हमें चुप रहकर भी लड़ना पड़ता है, और अगर आप सच्चे हैं, तो लोग खुद-ब-खुद आपके साथ खड़े हो जाते हैं।”

“मैं विषय नहीं, भावनाएं चुनती हूं” संवेदनशील विषयों पर फिल्में करने के सवाल पर यामी ने कहा, “मैं जानबूझकर कोई विषय नहीं चुनती। जब कोई कहानी दिल को छू जाती है, तो मैं उसे मना नहीं कर पाती। दर्शकों से जो प्यार और हिम्मत मिलती है, वही मेरा सबसे बड़ा सहारा है। मेरे लिए फिल्म अच्छी या बुरी नहीं होती — बस सच्चे दिल से कही गई होनी चाहिए।”

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